CRPF Women Warriors
जब भी हम CRPF का नाम सुनते हैं, ज़्यादातर लोग सोचते हैं – बॉर्डर पर ड्यूटी देने वाले मर्द जवान, जो दिन‑रात देश की रक्षा करते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि आज CRPF में हज़ारों महिला कमांडोज़ भी हैं, जो उतनी ही हिम्मत, मेहनत और दिल से देश की सेवा कर रही हैं। इनकी कहानियाँ सुनकर हमें सिर्फ गर्व ही नहीं होता, बल्कि ये भी महसूस होता है कि हिम्मत सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि सोच और दिल से आती है।
CRPF में महिलाओं की पहली बटालियन 1986 में बनाई गई थी। उस समय ये फैसला बहुत नया और साहसिक था, क्योंकि उस दौर में सुरक्षा बलों को सिर्फ मर्दों की दुनिया माना जाता था। धीरे‑धीरे इन Women Battalions की संख्या बढ़ी और आज CRPF की कई यूनिट्स में महिलाएं सबसे मुश्किल पोस्टिंग पर भी ड्यूटी कर रही हैं – चाहे वो VIP सुरक्षा हो, नक्सल प्रभावित इलाके हों या दंगे‑प्रदर्शन को कंट्रोल करना।
CRPF की महिला कमांडोज़ की ट्रेनिंग भी उतनी ही कठिन और demanding होती है, जितनी किसी भी male जवान की। रोज़ सुबह‑शाम लंबी दौड़ और obstacle course, हथियार चलाने की practice, भीड़ को काबू में रखने की special training, tough situations में calm रहने की mental तैयारी – ये सब सिर्फ शरीर को नहीं, दिमाग और दिल को भी तैयार करता है। इनमें से कई लड़कियां छोटे शहरों या गांवों से आती हैं, जिनके लिए इतनी सख्त ट्रेनिंग और discipline खुद में ही एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। लेकिन वो हार नहीं मानतीं।
CRPF Women Warriors के लिए सबसे मुश्किल होता है family से दूर रहना। कई‑कई महीनों तक घर ना जाना, बच्चों को मिस करना या त्योहारों पर घर ना पहुंच पाना – ये बातें इनकी कहानियों को और भी इंसानी बनाती हैं। कई महिला जवान कहती हैं – “जब हम घर की याद से कमजोर पड़ते हैं, तब हमें याद आता है कि हमारी ड्यूटी सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, पूरे देश के लिए है।”
एक महिला कमांडो ने कश्मीर में बर्फ़ में 24 घंटे तक ड्यूटी की, सिर्फ इसलिए कि उसकी पोस्ट पर कोई खतरा न आए। एक जवान ने बाढ़ में फंसे बच्चों को अपनी जान पर खेलकर बचाया। VIP सुरक्षा में कई महिला कमांडोज़ लगातार 16‑18 घंटे बिना आराम के खड़ी रहती हैं, और उसके बाद भी मुस्कुराती हैं। ये कहानियां सिर्फ उनकी हिम्मत नहीं दिखातीं, बल्कि वो जज़्बा भी बताती हैं जो हमें सिखाता है कि देशभक्ति सिर्फ शब्दों से नहीं, काम से साबित होती है।
ये सिर्फ symbolic नहीं हैं, बल्कि सबसे आगे खड़ी होती हैं। जहां भीड़ को कंट्रोल करना होता है, वहां महिलाओं की presence बहुत ज़रूरी होती है, ताकि महिला protesters भी सुरक्षित महसूस करें। ये सिर्फ जवान नहीं, कई बार counsellor, teacher और social worker की तरह भी काम करती हैं – local बच्चों को पढ़ाती हैं, महिलाओं से बात करती हैं और community में भरोसा बनाती हैं।
इनकी असली life भी उतनी ही inspiring है: ड्यूटी के बाद ये भी अपनी family से वीडियो कॉल करती हैं, बच्चों का होमवर्क देखती हैं। छुट्टी मिलने पर घर आती हैं तो पड़ोस की लड़कियों के लिए role model बन जाती हैं। गांव‑कस्बों में लोग इन्हें देखकर अपनी बेटियों को भी बड़ा सपना देखने के लिए motivate करते हैं।
क्योंकि ये दिखाती हैं कि वर्दी पहनने वाली महिलाएं भी हमारी तरह इंसान हैं – जो डरती भी हैं, थकती भी हैं, मगर फिर भी मुस्कुराकर अपनी ड्यूटी करती हैं। ये कहानियां हर लड़की को सिखाती हैं कि चाहे रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो, अगर दिल में हिम्मत है तो कुछ भी मुमकिन है।
CRPF Women Warriors सिर्फ एक force का हिस्सा नहीं, बल्कि लाखों लड़कियों की inspiration हैं। इनका सफर हमें सिखाता है कि सच्ची ताकत सिर्फ muscle में नहीं, बल्कि दिल और सोच में होती है।
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