CRPF जवानों की Mental Resilience
CRPF जवानों की Mental Resilience
भारत की आंतरिक सुरक्षा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। आतंकवाद, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, दंगों और प्राकृतिक आपदाओं से निपटते हुए सीआरपीएफ जवानों को भारी मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में mental resilience यानी मानसिक दृढ़ता न सिर्फ उनकी कार्यक्षमता के लिए, बल्कि जीवन की गुणवत्ता के लिए भी बेहद ज़रूरी है।
सीआरपीएफ के जवानों को अक्सर आतंकवाद और उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया जाता है, जहाँ लगातार खतरे का माहौल बना रहता है। लंबे समय तक परिवार से दूरी, अचानक ऑपरेशन और हिंसक झड़पों का तनाव भी मानसिक दबाव बढ़ाता है। कई बार ड्यूटी के दौरान सहकर्मियों की मृत्यु या गंभीर चोट का भी सामना करना पड़ता है, जिससे PTSD (Post-Traumatic Stress Disorder) जैसे मानसिक रोग का खतरा बढ़ जाता है।
तनाव को पहचानने और कम करने के लिए सीआरपीएफ में विशेष Stress Management Training दी जाती है। ऑपरेशन से पहले और बाद में ब्रीफिंग और डिब्रीफिंग के जरिए जवानों को मानसिक रूप से तैयार किया जाता है। ये तकनीकें मानसिक थकान और anxiety को कम करने में मदद करती हैं।
CRPF में मानसिक दृढ़ता बढ़ाने के लिए माइंडफुलनेस, योग और प्राणायाम को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा रहा है। रिसर्च में पाया गया है कि इससे तनाव, अनिद्रा और PTSD के लक्षणों में उल्लेखनीय कमी आती है। mindfulness से जवानों की awareness और emotional control भी बेहतर होता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यक्तिगत और समूह काउंसलिंग की सुविधा बढ़ाई जा रही है। trained psychologists जवानों को CBT (Cognitive Behavioral Therapy) जैसी evidence-based थेरेपी देते हैं, जो नकारात्मक विचारों को पहचानकर बदलने में मदद करती है। PTSD के cases में EMDR (Eye Movement Desensitization and Reprocessing) भी प्रभावी साबित हो रही है।
अब जवानों के लिए mobile apps और ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिए confidential counseling उपलब्ध कराई जा रही है। CRPF-specific culturally adapted digital tools पर भी काम हो रहा है, जिससे जवान कभी भी और कहीं भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता ले सकते हैं।
टीम भावना बढ़ाने और अकेलेपन को कम करने के लिए खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। ऐसा करने से जवानों का stress कम होता है और emotional support बढ़ता है।
तनाव के गंभीर स्तर को पहचानने के लिए विशेष monitoring systems विकसित किए गए हैं। शराब और नशे की रोकथाम के लिए नियम कड़े किए गए हैं, साथ ही जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जाती है। यह सब CRPF mental health को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
हाल की एक मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि इन interventions से जवानों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ। साथ ही job छोड़ने की इच्छा में भी कमी देखी गई। ये आंकड़े बताते हैं कि सही रणनीतियों से real impact होता है।
CRPF mental resilience को मजबूत करना सिर्फ जवानों की व्यक्तिगत भलाई के लिए नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है। योग, काउंसलिंग, mindfulness, stress management training और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म जैसे कदमों से जवानों की मानसिक दृढ़ता बढ़ रही है। मजबूत मनोबल वाला बल ही हर चुनौती का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है।
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