
जन्माष्टमी पूजा 2025: आसान चरणों में पूरी गाइड
भारत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भक्तजन इस अवसर पर उपवास रखते हैं, झांकियां सजाते हैं और मध्यरात्रि में भगवान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाते हैं। अगर आप पहली बार जन्माष्टमी व्रत या पूजा करने जा रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए एक आसान और शुरुआती गाइड है। यहां हम आपको स्टेप-बाय-स्टेप जन्माष्टमी पूजा विधि बताएंगे।
1. पूजा का सही समय जानें
- जन्माष्टमी की पूजा प्रायः अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में की जाती है।
- पूजा का सबसे शुभ समय मध्यरात्रि होता है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात 12 बजे हुआ था।
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2. पूजा की तैयारी करें
पूजा शुरू करने से पहले घर की सफाई और मंदिर को सजाना बहुत जरूरी है। इसके लिए:
- मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति या बाल गोपाल रखें।
- फूल, तुलसी पत्ते, धूप, दीपक, माखन-मिश्री, दूध और फल तैयार रखें।
- झूला सजाना न भूलें, क्योंकि भगवान बाल स्वरूप में झूले पर विराजमान होते हैं।
3. व्रत का संकल्प लें
जन्माष्टमी के दिन अधिकांश लोग व्रत रखते हैं।
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- संकल्प में कहें कि आप दिनभर उपवास करेंगे और रात्रि में भगवान का पूजन करेंगे।
- व्रत के दौरान फलाहार (फल, दूध, माखन-मिश्री) लिया जा सकता है।
4. कृष्ण भजन और कथा पाठ करें
पूजा से पहले और बाद में कृष्ण भजन गाना और श्रीकृष्ण जन्म कथा सुनना बहुत शुभ माना जाता है।

- “जय कन्हैया लाल की” जैसे भजन माहौल को भक्तिमय बनाते हैं।
- श्रीमद्भागवत गीता और श्रीकृष्ण जन्म कथा पढ़ना या सुनना पूजन का महत्व बढ़ाता है।
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5. पूजा विधि (Step by Step)
यहां शुरुआती भक्तों के लिए आसान पूजा विधि दी गई है:
- सबसे पहले भगवान कृष्ण की मूर्ति को स्नान कराएं (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें)।
- मूर्ति को नए वस्त्र पहनाएं और आभूषणों से सजाएं।
- भगवान को झूले में बैठाकर फूलों और तुलसी पत्र अर्पित करें।
- धूप, दीप और नैवेद्य (माखन-मिश्री, दूध, फल) चढ़ाएं।
- कृष्ण मंत्र और आरती करें।
- मध्यरात्रि में भगवान के जन्म का उत्सव मनाएं – शंख बजाएं, घंटियां बजाएं और भजन गाएं।
6. मध्यरात्रि जन्म उत्सव
- जैसे ही घड़ी रात 12 बजाए, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं।
- झूला झुलाएं, मिठाइयां बांटें और आरती करें।
- भक्तजन इस समय मंदिरों में विशेष दर्शन और झांकियां देखने जाते हैं।
7. प्रसाद वितरण
पूजा समाप्त होने के बाद भक्तजनों को प्रसाद बांटना सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
- माखन-मिश्री, पंचामृत, दूध और फल प्रसाद के रूप में बांटें।
- कुछ परिवार खिचड़ी या अन्य सात्विक भोजन भी प्रसाद के रूप में बनाते हैं।
8. व्रत पारण (व्रत खोलना)
अगले दिन प्रातः व्रत पारण किया जाता है।

- प्रातः स्नान करके भगवान की पुनः पूजा करें।
- उसके बाद फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।
👉 ध्यान रखें कि व्रत खोलते समय केवल शुद्ध और सात्विक भोजन ही करें।
9. जन्माष्टमी का महत्व
- जन्माष्टमी सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।
- यह दिन हमें श्रीकृष्ण के उपदेशों – सत्य, धर्म और कर्तव्य पालन – की याद दिलाता है।
- श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे हम कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर चल सकते हैं।
निष्कर्ष
जन्माष्टमी का पर्व भक्ति, प्रेम और आस्था से जुड़ा है। यदि आप पहली बार यह व्रत कर रहे हैं, तो ऊपर बताए गए 9 आसान चरणों का पालन करें। इस तरह आप सरल और भक्तिमय तरीके से पूजा कर सकते हैं।